जगदीश मैं तुमारी कैसे करूं बढ़ाई
जगदीश मैं तुमारी कैसे करूं बढ़ाई jagdish mai kese karu badai
जगदीश मैं तुमारी कैसे करूं बढ़ाई
तेरी अपार माया किससे लखी न जाई ॥टेक॥
सब वेद ग्रंथ भारे मुनिराज सिद्ध सारे
करकर विचार हारे अजहुं न पार पाई ॥१॥
चौदह भुवन रचाकर सब साजसे सजाकर
फिर जीव गण बसाकर लीलाश्रजब बनाई ॥२॥
तुझ रूप है अनाशी चेतन आनंदराशी
सब विश्वमें प्रकाशी सब जा रहा समाई ॥३॥
तुझको जो जीव ध्यावे सब पाप दोष जावे
ब्रम्हानंद मोक्ष पावे भवबंधको मिटाई ॥४॥
॥Tek॥
sab ved granth bhaare muniraaj siddh saare karkar vichaar haare aj hun na paar paaii ॥ 1 ॥
chaudah bhuvan rachaakar sab saaj mein sajaakar
fir jeev gaņa basaakar leelaa ajab banaaii ॥ 2 ॥
tujh roop hai anaashee chetan aanand raashee sab vishv mein prakaashee sab jaan rahaa samaaii II 3 ॥
tujhko jo jeev dhyaave sab paap dos jaave bramhaanand moksh paave bhav bandh ko mițaaii II 4 ॥
भजन अर्थ:-
जगदीश मैं तुमारी कैसे करूं बढ़ाई
तेरी अपार माया किससे लखी न जाई ॥ टेक॥
यह भजन ब्रह्मानंद ने लिखा है इस भजन में ब्रह्मानंद जी कह रहे हैं जगदीश मैं तुम्हारी बडाई कैसे करूं भगवान नारायण से जगत के ईश्वर से तुम्हारी बडाई कैसे करूं तेरी माया को कोई ना समझ पाया है तेरी माया कोई नहीं लिख पाया
सब वेद ग्रंथ भारे मुनिराज सिद्ध सारे
करकर विचार हारे अजहुं न पार पाई |
सब वेद ग्रंथ मुनियों ने पढ़ लिए लेकिन फिर भी विचार करें अभी पार नहीं हो पाए भव से पार नहीं हो पाए।
चौदह भुवन रचाकर सब साजसे सजाकर
फिर जीव गण बसाकर लीलाश्रजब बनाई
तुझ रूप है अनाशी चेतन आनंदराशी सब विश्वमें प्रकाशी सब जा रहा समाई |
भगवान तूने 14 भुवन बनाए उसमें एक-एक चीज़ बढ़िया साजाइ एक-एक चीज बहुत बढ़िया बनाई फिर उसमें जीव को बसाया यह बहुत अजीब लीला है तेरा रूप अविनाशी चेतन आनंद वाला है विश्व तुझ से प्रकाश पाता है और सारा विश्व तुझ में ही समा जाता है।
तुझको जो जीव ध्यावे सब पाप दोष जावे
ब्रम्हानंद मोक्ष पावे भवबंधको मिटाई।।
तुझको जो जीव ध्याता है तेरा ध्यान करता है तेरी पूजा करता है तेरा सुमरीन करता है उसके सारे पाप दोष दूर हो जाते है और मोक्ष को प्राप्त हो जाता है सारे बंधन छूट जाते हैं भाव से पर हो जाता है। यह भजन प्रभु की भक्ति को दर्शाता है प्रभु के प्रति प्रेम अनन्य भाव और प्रभु की माया को बताता है और ब्रह्मानंद जी कहते हैं जो प्रभु का ध्यान करता है वह भब से पर हो जाता है।
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